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एक थाना प्रभारी की मौत, व्यवस्था के सामने कई सवाल क्या अधिकारीके बलिदान से शराब माफिया का नेटवर्क टूटेगा

 शराब माफिया का दुस्साहस! तस्करी रोकने गए टीआई दिलीप पुरी को आयशर से कुचला, हरदा से गुजरात तक फैले नेटवर्क की जांच


1800 लीटर शराब, कई जिलों में पुलिस की दबिश और जायसवाल परिवार के नाम चर्चा में; गुजरात कनेक्शन में मोहिन जायसवाल का नाम, पुलिस ने राहुल को बताया मुख्य सरगना


देवास। मध्यप्रदेश में अवैध शराब के कारोबार का दुस्साहस अब पुलिस के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। देवास जिले के खातेगांव में अवैध शराब की तस्करी रोकने पहुंचे थाना प्रभारी निरीक्षक दिलीप पुरी की जान चली गई। पुलिस के अनुसार, हरदा जिले के टिमरनी से गुजरात ले जाए जा रहे अवैध शराब से भरे आयशर वाहन को रोककर तलाशी लेने का प्रयास किया गया, तभी चालक ने कथित तौर पर वाहन आगे बढ़ा दिया और दिलीप पुरी उसकी चपेट में आ गए। घटना के बाद चालक वाहन लेकर फरार हो गया। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो रहे हैं कि कानून के रखवालों की जान तक खतरे में पड़ रही है।


नर्मदा ढाबे के सामने हुई घटना, तलाशी मांगने पर बढ़ाया वाहन


देवास पुलिस के 2 नवंबर के प्रेस नोट के अनुसार, मुखबिर से सूचना मिली थी कि आयशर वाहन क्रमांक एमपी 43 एच 4786 में बड़ी मात्रा में अवैध शराब भरकर हरदा जिले के टिमरनी से गुजरात ले जाई जा रही है। सूचना के आधार पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कन्नौद के निर्देशन में चार टीमें गठित की गईं। संदलपुर फाटा स्थित नर्मदा ढाबे के सामने वाहन दिखाई देने पर खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी ने चालक को नीचे उतरकर तलाशी देने के लिए कहा। पुलिस के मुताबिक, चालक ने कथित तौर पर जान से मारने की नीयत से वाहन उनके ऊपर चढ़ा दिया और मौके से भाग निकला। इस दौरान आरक्षक सोहन जाट को भी वाहन से कुचलने का प्रयास किया गया, जिसमें वे घायल हो गए। दिलीप पुरी को बचाने के प्रयास किए गए, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।


1800 लीटर शराब और 208 पेटियों का मामला


मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जब्त आयशर वाहन में करीब 1800 लीटर शराब की 208 पेटियां मिलीं। प्रारंभिक जानकारी में शराब को हरदा से इंदौर के रास्ते गुजरात ले जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब कहां से भरी गई थी, उसे किसके निर्देश पर भेजा गया और गुजरात में इसकी आपूर्ति किसे की जानी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल गठित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।


हरदा से गुजरात तक फैले नेटवर्क में जायसवाल परिवार के नाम


पुलिस के प्रेस नोट में शराब कारोबार से जुड़े जिन नामों का उल्लेख किया गया है, उनमें पाटेन्द्र जायसवाल, राहुल जायसवाल, मनीष जायसवाल और मोहिन जायसवाल शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, शराब का ठेका पाटेन्द्र जायसवाल के नाम पर है। प्रारंभिक जांच में राहुल, मनीष और मोहिन की 30-30 प्रतिशत तथा पाटेन्द्र की 10 प्रतिशत भागीदारी की जानकारी सामने आई है। प्रेस नोट के मुताबिक, मनीष इंदौर, मोहिन गुजरात और पाटेन्द्र बड़वानी जिले में रहता है।


सबसे अहम बात यह है कि पुलिस ने राहुल जायसवाल को हरदा में रहकर गुजरात तक अवैध शराब की तस्करी का नेटवर्क संचालित करने वाला मुख्य सरगना बताया है। पुलिस के अनुसार, शराब के कारोबार से प्राप्त रकम राहुल के पास जमा होती थी और फिर अन्य लोगों को उनके हिस्से का भुगतान किया जाता था। हालांकि, इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।


गुजरात कनेक्शन में मोहिन जायसवाल की भूमिका भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है। पुलिस के प्रेस नोट में उसका नाम भागीदार के रूप में दर्ज है और उसके गुजरात में रहने का उल्लेख किया गया है। लेकिन उपलब्ध प्रेस नोट में उसे पूरे नेटवर्क का मुख्य मास्टरमाइंड घोषित नहीं किया गया है। इसलिए यह जांच का विषय है कि गुजरात में शराब की आपूर्ति, वितरण और नेटवर्क के संचालन में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी।


चालक गजेन्द्र उर्फ अक्कू रावत, वाहन उपलब्ध कराने वाले केरम सिंह की भूमिका की जांच


पुलिस के अनुसार, आयशर चालक की पहचान अलीराजपुर जिले के निवासी गजेन्द्र उर्फ अक्कू रावत के रूप में हुई है। प्रेस नोट में केरम सिंह चंगोड़ का नाम भी सामने आया है, जिसने कथित तौर पर वाहन उपलब्ध कराया था। पुलिस उसे अभिरक्षा में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी दे चुकी है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वाहन किसके निर्देश पर रवाना हुआ, उसे रास्ते में पुलिस की कार्रवाई से बचाने के लिए कोई अन्य वाहन आगे चल रहा था या नहीं और इस पूरे घटनाक्रम में किन लोगों की भूमिका रही।


इंदौर के विजय राव का नाम भी आया सामने


पुलिस के प्रेस नोट के अनुसार, इंदौर निवासी विजय राव को भी पुलिस अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रेस नोट में उल्लेख है कि उसने राहुल जायसवाल के लिए अवैध शराब तस्करी के नेटवर्क में काम करना स्वीकार किया है। पुलिस अब इस कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों, शराब की सप्लाई और रकम के लेन-देन की जांच कर रही है।


पांच जिलों में दबिश, फरार आरोपियों पर इनाम


देवास पुलिस के अनुसार, अवैध शराब की तस्करी के नेटवर्क से जुड़ी जानकारी मिलने के बाद पांच जिलों में टीमें गठित कर कार्रवाई की जा रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए देवास पुलिस अधीक्षक की ओर से दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किए जाने की जानकारी प्रेस नोट में दी गई है। मामले की जांच अब केवल आयशर चालक तक सीमित नहीं है, बल्कि शराब के स्रोत, परिवहन, वितरण और इससे जुड़े लोगों की भूमिका तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।


शराब दुकानों पर भी कार्रवाई, जांच के घेरे में पूरा कारोबार


घटना के बाद हरदा जिले में पाटेन्द्र जायसवाल के लाइसेंस पर संचालित टिमरनी की दो और रहटगांव की एक शराब दुकान को सील किए जाने की खबर सामने आई है। तीनों दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए जाने की जानकारी भी प्रकाशित हुई है। प्रशासनिक कार्रवाई से साफ है कि जांच का दायरा केवल सड़क पर पकड़े गए वाहन तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि शराब के स्रोत और दुकानों से उसके संभावित संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।


एक थाना प्रभारी की मौत, व्यवस्था के सामने कई सवाल



दिलीप पुरी की मौत केवल एक पुलिस अधिकारी की असमय मृत्यु नहीं, बल्कि अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। यदि हरदा से गुजरात तक शराब की इतनी बड़ी खेप भेजी जा रही थी, तो इसके पीछे परिवहन, आपूर्ति और वितरण का कितना बड़ा तंत्र काम कर रहा था? क्या इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हैं? शराब की खेप किन दुकानों से निकली और उसे कहां पहुंचाया जाना था? इन सवालों के जवाब जांच से सामने आने चाहिए।


अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की है कि इस पूरे नेटवर्क की प्रत्येक कड़ी की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई हो और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को केवल उसके रसूख के कारण राहत न मिले। दिलीप पुरी को खोने के बाद जनता की अपेक्षा केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध शराब के पूरे तंत्र पर निर्णायक कार्रवाई की है।


नोट: यह समाचार देवास पुलिस के प्रेस नोट और 2 नवंबर 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। जिन व्यक्तियों के नाम अवैध शराब के कारोबार से जुड़े होने के आरोपों में सामने आए हैं, उनकी भूमिका जांच का विषय है। किसी भी व्यक्ति का दोष न्यायालय में प्रमाणित होने तक उसे दोषी नहीं माना जाना चाहिए।