देवास शहर की प्राइम रूट पर चलने वाली बसों ने 2 मार्च से हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है
लेकिन खास बात यह है की उस हड़ताल से देवास इंदौर की उपनगरीय बसों के मालिकों ने यह निर्णय लिया है की वे इस हड़ताल में शामिल नही होंगे
बताया गया है की उपनगरीय बस सेवा का मध्यप्रदेश शासन के द्वारा वर्ष 1992 में गजट नोटिफिकेशन के द्वारा तत्कालीन पटवा सरकार ने किया था तभी से लगभग 84 बसों को परमिशन दी गयीं थी ओर वर्तमान में 20 से 22 बसे चल रही है
जोकि हड़ताल में शामिल नही होंगी
जो बसों के मालिक प्राइम रूट पर अपनी बसों को चला रहें है वे वर्ष 2005 में मध्यप्रदेश सड़क परिवहन निगम के बंद होने के बाद 2006 से बसों को लीज पर देने की शुरुआत की गयीं थी
लेकिन बसों को लीज पर लेकर बस चलाने वालों ने घाटा बता कर लीज का पैसा भी शासन को नही दिया था वर्ष 2010-11में लीज को केसिंल किया गया ओर कुछ लोगो ने अपने परमिट लें लिए
पहले बसों के संचालन में 10 मिनट से 20 मिनिट की देरी से बसे चलती थी बाद में बसों की संख्या बढ़ा कर 36 कर दी गयीं ओर इन्ही बसों के रूट को प्राइम रूट नाम दे दिया गया था वर्तमान में गाड़ियां 5 मिनट की अंतराल से चल रही है जिससे कि गाड़ियों में ओवरटेकिंग की समस्या हो रही है जिससे दुर्घटना होती है कई गाड़ी मालिकों द्वारा अपनी गाड़ियों को ठेके पर दे दिया गया है ठेके पर देने का कारण जिन लोगों ने ठेके पर गाड़ी ली है वे लोग तेज गति से अपनी गाड़ियों को दौड़ते हैं और एक-एक गाड़ी देवास इंदौर के बीच चार फेरे लगा ती है
जबकि उपनगरीय बस सेवा के द्वारा जो कभी 80 गाड़ियां थी अब मात्र 20/22 गाड़ियां बची है तीन फेरे प्रतिदिन लगा ती है और गाड़ियों के द्वारा दुर्घटना करने पर बदनामी उपनगरिय बस सेवा के नाम पर ही होती है
उप नगरीय बस सेवा के मालिकों द्वारा पुलिस में प्रशासन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हुए हड़ताल की अवधि में उनकी गाड़ियों की सुरक्षा व्यवस्था की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं यह लोग जनहित में हड़ताल में भाग नहीं लेंगे।
गौरतलब हैकि उपनगरीय बस सेवा प्राइम रूट से पहले की है ओर देवास इंदौर मार्ग पर कई बसों के मालिकों के द्वारा अपनी बसों को ठेके पर दे कर बसों का संचालन किया जा रहा है
जिससे देवास इंदौर मार्ग पर बसों को ठेके पर लेने वाले लोग ही ओवर लोडिंग व ओवर टेकिंग करते है जिससे दुर्घटना होती है
बसों को प्राइम रूट पर चलाने वाले प्रति गाड़ी 4 ट्रिप लगाते है जबकि उपनगरीय बस वाले अपनी निर्धारित 3 फेरे ही लगाते है
