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मध्यप्रदेश में भाजपा के दाँव से कांग्रेस उलझन में

 मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शुरुआत में ही बढ़त हासिल करने की कोशिश की है कांग्रेस की सूची से पहले ही भाजपा ने अपनी दो सूची जारी कर दी है जिससे वह अपने प्रत्याशी को अधिक समय दे रही है ताकि उसका प्रत्याशी अपनी तैयारी कर सके वहीं कांग्रेस अभी भी रुको ओर देखो की पॉलिसी पर चल रही है

भाजपा ने दोनों सूची को जारी कर यह बता दिया है कि वह मध्यप्रदेश में चुनाव की चुनौती सामान्य रूप से नही ले रही है दूसरी सूची में 3 केंद्रीय मंत्री व 7 सांसदों को टिकट दे कर उसने साबित कर दिया है वहीं कांग्रेस में बड़े नेताओं की भारी कमी है क्योंकि जितने भी बड़े नेता है वे सभी हाशिये पर है और पूरे मध्यप्रदेश में पहले तो बहुत सारे गुट थे जिनके नेता पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के गुट के कारण हाशिये पर पहुचा दिये गए हैं अब उनके ही टिकट के लिए मारामारी है तो वे अपने समर्थकों को कैसे टिकट दिलवा पाएंगे

गौरतलब है कि कांग्रेस के दोनों पूर्व मुख्यमंत्री अपने अपने पुत्रों के मोह कारण कांग्रेस में किसी को भी आगे नही आने देना चाहते हैं और इनके अलावा ज़ो भी नेता है वे सिर्फ आलाकमान को अपना दुखड़ा सुना कर आ जाते है सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव को बुराहनपुर से टिकट के लिए मना कर दिया गया है

भाजपा आगे भी अपनी रणनीति से कांग्रेस को चौकाती रहेगी साथ ही भाजपा इस बार मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में गुजरात मॉडल को लागू कर सकती है यह भाजपा की मजबूरी भी हो सकती है क्योंकि विगत 18 वर्षो से भाजपा यहां पर शासन कर रही है एन्टी इनकंबेंसी की सम्भावना भी है जहाँ पर भाजपा के अंदरूनी सर्वे की रिपोर्ट में जिन विधायकों के खिलाफ माहौल है वहाँ पर नये उम्मीदवार को घोषित किया जा सकता है।