नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला आरक्षण बिलसितंबर 2023 में संसद से पारित हो चुका था और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन गया था, जो लोकसभा/विधानसभाओं में 33% आरक्षण सुनिश्चित करता है। हालांकि, अप्रैल 2026 में हुए अपडेट्स के अनुसार, इसके कार्यान्वयन, परिसीमन और सीटों में वृद्धि से संबंधित नए संशोधनों पर राजनीतिक सहमति न बन पाने के कारण यह बिल पास नहीं हो पाया।
भारतीय जनता पार्टी ने एक राजनीतिक खेल को खेला इस खेल के दौरान जहां एक और तमिलनाडु था वहीं दूसरी ओर बंगाल चुनाव बंगाल चुनाव में महिलाओं की हिस्सेदारी को बढ़ाने को लेकर यह सारा खेल खेला गया क्योंकि तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी के पास पानी के लिए और खोने के लिए कुछ भी नहीं था इसलिए उसने एक प्रकार से नियंत्रित क्षति को देखते हुए और बंगाल में देश की आधी आबादी महिलाओं के वोटर को विपक्ष के विरोध में खड़ा करने हेतु इस खेल को खेला गया था यदि बंगाल चुनाव में मात्र चार से पांच परसेंट बंगाल की महिलाओं के ओटो को अपनी ओर लाने में कामयाब हो जाती है तो यह भारतीय जनता पार्टी के लिए काफी सुखद होगा जिससे कि उसका बंगाल में अपनी सरकार बनाने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो जाए
सभी मीडिया घराने और पत्रकार लोग जहां कुछ लोग विपक्ष की जीत का बखान कर रहे हैं वहीं कुछ लोग गोदी मीडिया कहे जाने वाले मीडिया संस्थानों को भाजपा के फेवर में इस बिल को गिरना बता रहे हैं लेकिन वह लोग या भूल जा रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी अब वह पहले जैसी पार्टी नहीं रही जिस पार्टी विथ डिफरेंस की श्रेणी में रखा जाता था यानी कि वह अन्य दलों से अलग निर्धारित मापदंडों पर चलकर अपनी सरकार को बनाती थी वह चलाती थी यह वही भारतीय जनता पार्टी है जिसके प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने मात्र एक वोट से अपनी सरकार का गिरना मंजूर किया था लेकिन एक वोट को नहीं खरीदा था और अपनी सरकार को कुर्बान कर दिया था लेकिन भारतीय राजनीति में आज के दौर में राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले देश के गृहमंत्री अमित शाह वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जोड़ी ने एक यह जो जुआ खेला था इसमें क्षति होने के लिए मात्र कुछ ही प्रतिशत की संभावना थी और प्राप्त होने के लिए उनको बंगाल में अपनी सरकार बनते हुए दिख रही थी इसलिए यह नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल को परिसीमन के साथ लोकसभा में पेश किया गया था यह तो आंकड़ों के हिसाब से उन्हें भी जाहिर था की हम इस बिल को पारित नहीं कर सकते हैं लेकिन यदि यह बिल गिर गया तो इसका दोष विपक्ष की पार्टीयो पर ही माना जाएगा
2023 का कानून नारी शक्ति वंदनअधिनियम 106वां संवैधानिक संशोधन था, जो 2029 या उसके बाद की जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होना था।
2026 की स्थिति सरकार इस कानून के कार्यान्वयन में तेजी लाने 2029 से पहले के लिए और परिसीमन से जुड़े संशोधनों के साथ 131वां संवैधानिक संशोधन बिल लाई थी, जो विपक्ष के विरोध के चलते लोकसभा में 2/3 बहुमत 352 वोट न मिलने से गिर गया।
विवाद विपक्षी दलों का आरोप था कि यह बिल SC, ST, और OBC महिलाओं के अधिकार के खिलाफ है और चुनावी नक्शा बदलने का एजेंडा है।
फिलहाल 2023 वाला मूल कानून मौजूद है, लेकिन इसे लागू करने की प्रक्रिया में नए संशोधनों के कारण राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है।
यह भी बात सत्य है कि कांग्रेस के द्वारा इतने वर्षों में महिलाओं के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल को जब-जब भी लाया गया था तो कांग्रेस के द्वारा इसको पास करने के लिए तमाम प्रकार की आरक्षण लगाई गई थी नरेंद्र मोदी सरकार के पूर्व में भी जब 10 वर्षों तक कांग्रेस का शासन रहा था तब भी वह या नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल्कुल पास नहीं कर पाई थी जो लोग भी सरकार में रहते हैं वह उसका राजनीतिक लाभ तो लेते ही हैं यदि एनडीए की सरकार यह सभी चीज ला करके यदि देश की यदि आबादी को लोकतंत्र में अपनी हिस्सेदारी दे रही है तो मेरा यह मानना है कि विपक्षी पार्टियों द्वारा जो यह बिल गिराया गया है इसका खामीयाजा उन्हें निकट भविष्य के चुनाव में भुगतना ही होगा
