कोंख मे ही दो कुलो को रोशन करने वाली बिटिया को उजाड़ देने का सौदा करने वाली डाक्टरों पर हो मुकदमा दर्ज, क्यों हैवो सलाखों के बाहर, ऐसे डाक्टरों के नर्सिंग होम की जाँच, साथ ही वहाँ पर पदस्थ लोगो की योग्यता को भी जाँचा जाये।
1,यदि इनके नर्सिंग होम की जाँच हो तो ये आवासीय परिसर मे व्यवसायिक कार्य कर रहें है
2,बिना योग्यता के लोगो को अपने यहाँ पर काम रखा है
3,इनके यहाँ पर कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है जो श्रम नियमों का खुला उल्लंघन है
4,खुद की ही लेब पर जाँच जोकि वार्षिक ठेके पर
5,खुद का ही मेडिकल जोकि वार्षिक ठेके पर
6,नर्सिंग होम को नियमानुसार नहीं बनाया गया नक्शे के विपरीत बनाया गया है
7,सभी नर्सिंग होम पर वहाँ पर मौजूद व्यवस्था की दर को भी प्रदर्शित नहीं किया गया है
शहर में वायरल हुए एक वीडियो ने एक बार फिर समाज के उस कड़वे सच को सामने ला दिया है, जहां आज भी कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर कुप्रथा जिंदा है। यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि चिकित्सा व्यवस्था और सामाजिक मानसिकता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
बताया जा रहा हैकि बाहर से लोगो आकर यहाँ पर गर्भ मे पल रहें बच्चे की जाँच के साथ अनचाहे गर्भ को भी ठिकाने लगाने के काम किये जा रहें है
यह मामला सिर्फ देवास शहर का ही नहीं अपितु देवास जिले मे फैला हुआ है जिले की कुछ प्रायवेट प्रेक्टिस करने वाले, बंगाली डाक्टर, झोला छाप डाक्टरो के साथ कुछ लेब चलाने वाले फर्जी लोग जोकि पेथोलाजिस्ट को महीने के निर्धारित पैसे देकर अपनी लेबो का संचालन कर रहें है ये सभी लोग कमीशन के आधार पर अपने पेशेंट भेजते है
सामने आए वीडियो में कथित रूप से एक महिला चिकित्सक पैसे के बदले कन्या भ्रूण गिराने की बात करती सुनाई दे रही है। बातचीत में वह अगले दिन आने का समय भी तय करती नजर आती है। इस खुलासे ने संकेत दिए हैं कि शहर में अवैध गर्भपात का नेटवर्क सुनियोजित तरीके से संचालित हो रहा है।
सिर्फ एक ही डाक्टर पर केस दर्ज बाकियो को छूट ऐसा क्यों?
मामले के सामने आते ही प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए महिला चिकित्सक डॉ. चारु तिवारी के खिलाफ पीसीपीएनडीटी एक्ट और एमटीपी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज दी है अब वे उच्च न्यायालय मे अपनी जमानत का प्रयास करेंगी
देश भर में देवास की बदनामी का विषय बने इस गंभीर मामला को लेकर देवास के चौराहों पर आम लोगों में जनचचर्चा का दौर जारी है कि वायरल वीडियो में भ्रूण हत्या और कन्या के भ्रूण की सफाई करने का सौदा करने वाली डॉक्टर को फरार कराने में कहीं ना कहीं पुलिस की ही अहम भूमिका है? वरना जैसे ही यह मामला संज्ञान में आया था पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार क्यों नहीं किया। मुकदमा दर्ज होने के इतने दिन बीत जाने के बाद भी अब तक देवास पुलिस आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। यह बात पुलिस
की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है? लाइसेंस निरस्त, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल
सूत्रों के अनुसार यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। शहर में भ्रूण लिंग परीक्षण और अवैध गर्भपात से जुड़ा एक बड़ा सिंडिकेट नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है। देवास की एक डॉक्टर के द्वारा धूण गर्भपात करने के सौदेबाजी का वीडियो वायरल होने के बाद यह बात स्पष्ट प्रतीत होती है की डॉक्टरी पेशे में कहीं ना कहीं इस प्रकार के डॉक्टरों का एक सिंडिकेट नेटवर्क सक्रिय जरूर है। यदि यह सच साबित होता है, तो यह कानून और मानवता- दोनो के खिलाफ है
यह घटना उस सोच को भी उजागर करती है, जहां बेटियों को आज भी बोझ समझा जाता है। एक डॉक्टर, जिसे जीवनदाता माना जाता है, यदि वही जीवन खत्म करने का माध्यम बन जाए, तो यह समाज के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।
देवास जिले के नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि ऐसे डाक्टरों के खिलाफ पुलिस व प्रशासन कोकड़ी व बड़ी कार्यवाही करनी चाहिए इन सभी को जल्द गिरफ्तार कर पूरे सिंडिकेट नेटवर्क का खुलासा किया जाए। साथ ही, भविष्य में इस तरह के अमानवीय कृत्यों पर रोक लगाने के लिए सख्त और निरंतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कानून अपना काम करेगा, कार्यवाही होगी
देवास के लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या के मामले में रविवार को देवास पहुंचे प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा से जब सवाल पूछे तो उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर आरोप लगे हैं उन्हें बख्शा नहीं जाएगा, कानून अपना काम करेगा।

