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आबकारी विभाग ने टोंकखुर्द में कार्यवाही कर 103 पेटी देशी,विदेशी मदिरा जप्त

 आबकारी विभाग ने टोंकखुर्द में कार्यवाही कर 103 पेटी देशी,विदेशी मदिरा जप्त।


 देवास 05 अप्रैल 2026/कलेक्टर  श्री ऋतुराज सिंह के निर्देशानुसार अवैध  मदिरा के निर्माण, विक्रय एवं परिवहन करने वालों के विरुद्ध लगातार कार्यवाही की जा रही है।

इसी कड़ी में विभाग द्वारा टोंकखुर्द में कार्यवाही कर देशी विदेशी मदिरा जब्त की।

सहायक आबकारी आयुक्त श्री मनीष खरे ने बताया कि  आबकारी वृत देवास  द्वारा

 दिनांक 05.04.2026 को सूचना प्राप्त हुई कि टोंकखुर्द में एक ढाबे पर बड़ी मात्रा में अवैध शराब रखी हुई है। सूचना के  तुरन्त आबकारी टीम गठित कर रवाना किया।आबकारी की  टीम द्वारा   रेस्टोरेंट पर पहुंचकर समक्ष विधिवत तलाशी ली गई, जिसमे रेस्टोरेंट के अंदर से 103 पेटी देशी-विदेशी मदिरा कुल मात्रा 961.6 बल्क लीटर बरामद की गई। अवैध रूप से संग्रह कर रखी हुई थी।एक व्यक्ति को मौके से गिरफ्तार किया गया उसके विरुद्ध मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1) क एवं 34(2) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया तथा आरोपी से पूछताछ कर अन्य लागों की तलाश की जा रही है,जप्त सामग्री का मूल्य लगभग 774228 रुपये है l

             आज की कार्यावाही में आबकारी उपनिरीक कैलाश जामोद ,आबकारी उप निरीक्षक प्रेम यादव आबकारी आरक्षक आशीष गुप्ता सम्मिलित रहे, इस प्रकार की कार्यवाही  निरंतर जारी रहेगी।



अवैध शराब पर बड़ी कार्रवाई… लेकिन कई गंभीर सवाल भी खड़े!


टोंक खुर्द के ढाबे से 103 पेटी शराब जब्त, एक आरोपी गिरफ्तार — लेकिन असली कहानी अब भी अधूरी



 अब उठ रहे हैं गंभीर सवाल

इतनी बड़ी मात्रा में शराब आखिर किसकी है?

103 पेटी शराब कोई सामान्य बात नहीं है। इसके पीछे किसी बड़े सप्लायर या ठेकेदार की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।


क्या यह शराब किसी लाइसेंसी ठेके से आई है  ?

यदि हां, तो उस ठेकेदार की पहचान और उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?


 सिर्फ एक व्यक्ति ही जिम्मेदार कैसे  ?

इतने बड़े स्तर पर अवैध संग्रहण और विक्रय बिना नेटवर्क के संभव नहीं, फिर बाकी लोग कहां हैं?


 ढाबा ही क्यों बना स्टोरेज ?

क्या यह स्थान सिर्फ एक माध्यम था, जहां से अवैध शराब की सप्लाई आगे की जा रही थी?


क्या स्थानीय स्तर पर जानकारी या मिलीभगत थी?

इतनी बड़ी मात्रा में शराब बिना किसी की जानकारी के जमा होना कई सवाल खड़े करता है।


 जांच की दिशा पर निगाह अब प्रशासन को रखनी चाहिए क्योंकि इसके पूर्व मे भी ऐसे कई मामले हुवें बरोठा का मामला, देवास शहर मे कई दुकानों पर इंदौर जिले का माल जप्त हुआ था महीनो बीत जाने के बाद भी विभाग पुलिस को nh8 बता पा रहा कई कार्यवाही मे जप्त शराब किसकी है 

इस तरह से की गयीं कार्यवाही से विभाग की छवि को धब्बा लगता है 

हालांकि आबकारी विभाग द्वारा अन्य आरोपियों की तलाश और पूछताछ की बात कही जा रही है, लेकिन यह मामला केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जरूरत है कि पूरे नेटवर्क सप्लायर, ठेकेदार और परिवहन कड़ी  तक जांच पहुंचे।