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चार बेटे, एक संकल्प – माता,पिता को महाकाल के दर्शन कराने निकले 'श्रवण कुमार

 लोकेशन देवास 

ब्यूरो राजेश पाठक 

देवास मध्य प्रदेश 

 चार बेटे, एक संकल्प – माता,पिता को महाकाल के दर्शन कराने निकले 'श्रवण कुमार


जहाँ एक ओर आधुनिक जीवनशैली और व्यस्तता की दौड़ में परिवारों में दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं, वहीं मध्यप्रदेश के देवास ज़िले के एक छोटे से गांव — भीमसी — से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है, जो रिश्तों की गर्माहट और भारतीय संस्कारों की जीवंत मिसाल बन गई है।


भीमसी गांव के बुज़ुर्ग प्रहलाद नायक अब जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं। मगर उनकी झुकी कमर अब अकेली नहीं — कंधे बने हैं उनके चार बेटे: राजेश, धर्मेन्द्र, श्रवण और अर्जुन।


चारों भाइयों ने मिलकर यह संकल्प लिया है कि वे बारी-बारी से अपने पिता को उज्जैन के पवित्र महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन कराने ले जाएंगे। न सिर्फ़ एक यात्रा, बल्कि यह सेवा, स्नेह और श्रद्धा का अद्वितीय संगम है।"


"यह कहानी हमें एक नहीं, बल्कि चार-चार 'श्रवण कुमारों' की याद दिलाती है — जिन्होंने अपने पिता की सेवा को अपना धर्म और सौभाग्य मान लिया।"


"हर बेटा अपने हिस्से का प्रेम, सम्मान और पुण्य अर्जित करना चाहता है — और यही वो संस्कार हैं, जो आज के समाज को फिर से जोड़ सकते हैं। जब बेटे ऐसे हों, तो महाकाल की कृपा भी साक्षात् होती है। और जब रिश्तों की डोर इतनी मजबूत हो, तो समाज को मिलती है संस्कारों की नई परिभाषा और प्रेरणा की नई दिशा।"