गौरतलब है कि जब भी केंद्र सरकार कोई भी कानून लाती है तो विपक्ष संसद के दोनों सदनों में गैर हाजिर हो कर चर्चा में भाग नही लेता फिर 70 वर्षों से जो लोग अपनी दुकान चला रहे हैं वो जनता को भड़काने का काम कर रहे हैं ।
पूर्व में भी ऐसे ही प्रयास केन्द्र सरकार के खिलाफ किये गये थे इस टूलकिट गैंग को देश व विदेश से प्रोत्साहित किया जा रहा है
इस प्रवृत्ति पर भारी अर्थदण्ड और कारावास का प्रावधान बढ़ाया गया है । कानून तो पहले से है ।
पर बिना समझे विरोध हो रहा है । वैसा ही विरोध जैसे ड्रिंक एंड ड्राइव पर दस हजार रुपए अर्थ दण्ड करने पर किया था । भैया दारू पीकर मत चलाइए ना वाहन, पुलिस प्रशासन आपके घर थोड़ी आ जायेगा जबरदस्ती आपकी जेब से दस हजार निकालने।
वैसे ही दुर्घटना हो जाए तो भागिए मत, पुलिस प्रशासन का सहयोग कीजिए और संभव हो तो घायल की सहायता ।
न भागने का अर्थ दुर्घटना स्थल ही पर खड़े रहना नहीं है बल्कि यदि भीड़ द्वारा पिटाई की आशंका हो तब घटना स्थल से स्वयं को बचाकर, भागकर पुलिस थाने पर समर्पण करना है ।
ऐसा होने से हिट एंड रन का केस नहीं बनेगा । अन्यथा सीसी टीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शी द्वारा नंबर बताए जाने या अन्य प्रमाणों के आधार पर पुलिस वाहन और ड्राइवर को पकड़ती है तो हिट एंड रन का केस बनेगा जिसमे 10 लाख तक का अर्थ दण्ड या दस वर्ष कारावास का प्रावधान है ।
तत्काल सरेंडर करने से जांच हो सकती है कि ड्राइवर नशे में तो नहीं है । साथ ही वाहन नंबर /मालिक पता होने से पीड़ित को बीमा राशि मिल सकती है जो अज्ञात वाहन में नहीं मिलती ।
कोर्ट केस में प्रमाणित होगा कि गलती किसकी थी, उस आधार पर न्याय होगा । दुर्घटना के बाद भाग जाने की वृत्ति को रोकने के लिए दंड बढ़ाया है । यदि ड्राइवर दारू पिए नहीं है, वैध लाइसेंस के साथ वाहन बीमा, फिटनेस और परमिट के साथ चला रहा है तो गलती किसी की भी हो भागने की जरूरत ही क्या है... भागेगा वही जिसके साथ लोचा है । कृपया ध्यान दीजिए कि ना भागने का अर्थ घटना स्थल पर ही खड़े रहना नहीं है बल्कि समय रहते पुलिस स्टेशन में सरेंडर कर देना है ताकि जांच सही हो, बीमा क्लेम संबंधी औपचारिकता पूरी हो, घायल या मृतक के परिवार को आर्थिक मुआवजा मिले और निर्दोष को न्याय मिले ।
निर्दोष ड्राइवर भी हो सकता है पर भाग जाना और पुलिस की पकड़ से बचने का प्रयास अपने आप में अपराध है ...
कहा गया है कि कर नहीं तो डर नहीं , यहां हिट एंड रन में भी यही बात लागू होती है । यह केवल वैतनिक ड्राइवर पर लागू नहीं होता बल्कि स्वयं का वाहन चला रहे सलमान खानों पर भी होता है जो फुटपाथ पर सोते लोगों को हिट कर भाग जाते हैं ।
पेट्रोल और डीजल न मिलने पर एकदम बेचैन न हों।
हिट एंड रन कानून आपके भले के लिए ही बनाया गया है।
आपको भेड़ बकरी समझ कर रौदने वाले बस, ट्रक और डंपर चालकों पर लगाम कसनी जरूरी है। थोड़ा वक्त जरूर लगेगा लेकिन प्रशासन इस संकट को दूर कर लेगा लेकिन यदि ड्राइवर की मनमानी जीती तो ये शराब पीकर हम-आपको ऐसे ही कुचलते रहेंगे।
नियम-कानून के डर से ये कम से कम थोड़ा तो रहम दिखाएंगे।
जरूरत पड़े तो कुछ दिन पैदल चलने की भी तैयारी करो लेकिन अपने हित के लिए बनाये कानून का समर्थन करो।