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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के स्थापना दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र, देवास पर तकनीकी दिवस एवं प्रदर्शनी का आयोजन

 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के स्थापना दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र, देवास पर तकनीकी दिवस एवं प्रदर्शनी का आयोजन



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देवास 18 जुलाई 2023/ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली (ICAR, New Delhi) के 95वें स्थापना दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र देवास में कृषक परिचर्चा एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से किसान कल्याण तथा कृषि विकास केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर किसान कल्याण तथा कृषि विकास राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी एवं मत्सय, पशुपालन व डेयरी मंत्री श्री पुरूषोत्तम रूपाला एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महा-निदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा द्वारा कृषकों को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया गया एवं कृषकों की आय को दोगुना करने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिये। कार्यक्रम के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा विकसित नई तकनीकियां, सुरक्षा के क्षेत्र में प्राप्त महत्वपूर्ण उपलब्धियां व प्रदर्षनों के माध्यम से किसानों को जागरूक किया गया। 

कार्यक्रम की शुरूआत में केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. ए.के.बड़ाया ने फसलों में बढ़ती खरपतवारों की समस्या हेतु किसानों को समन्वित खरपतवार प्रबंधन अंतर्गत यांत्रिक, भौतिक, रासायनिक, जैविक एवं खरपतवार नियंत्रण पर चर्चा की। उन्होंने सोयाबीन में खरपतवार प्रबंधन हेतु समय-समय पर बदल-बदल कर खरपतवारनाषी का प्रयोग करने की सलाह दी। साथ ही खरपतवार नाशियों के प्रयोग में आने वाली सावधानियों की विस्तृत चर्चा की।

केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. के.एस.भार्गव ने खेती में उपयोग होने वाले विभिन्न सिंचाई तरीकों के बारे में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि नई-नई तकनीकी जैसे स्प्रिंकलर, ड्रिप इत्यादि का उपयोग कर पानी की बचत की जा सकती है और साथ ही उन्होंने खेती में लागत कम करने के लिए मषीनरी के उपयोग एवं उनके रख-रखाव के बारे में विस्तारपूर्वक बताया।

केन्द्र के उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. निषिथ गुप्ता ने खेती में आमदनी बढ़ाने हेतु फल एवं सब्जी की खेती करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने हेतु फूलों की खेती करने का सुझाव दिया।

केन्द्र के कीट वैज्ञानिक डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि सोयाबीन की फसल लगभग 20-25 दिन की हो गई है। इस समय प्रमुख रूप से तना मक्खी, गर्डल बीटल व सेमीलूपर का प्रकोप हो सकता है। जिसके नियंत्रण हेतु विभिन्न प्रकार की विधियों के साथ रासायनिक नियंत्रण  के बारे में विस्तार से बताया और साथ ही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने हेतु कम से कम एक या दो बार जैविक कीटनाशी का छिड़काव करने की सलाह दी।

केन्द्र के शस्य वैज्ञानिक डॉ. महेन्द्र सिंह ने खरीफ फसल अंतर्गत सोयाबीन, मक्का, ज्वार की उन्नत उत्पादन तकनीक के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने सोयाबीन की फसल में कम लागत में अधिक उत्पादन करने हेतु बीजोपचार, उन्नत प्रजातियों का चुनाव, उर्वरक प्रबंधन आदि करने पर जोर दिया।

केन्द्र की मत्स्य वैज्ञानिक डॉ. लक्ष्मी ने जैव विवधिकरण को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य पालन पर जोर देते हुए कहा कि अनउपजाऊ जमीन पर तालाब बनाकर अतिरिक्त आमदनी हेतु मत्स्य पालन कर आय अर्जित कर सकते हैं। केन्द्र की प्रसार वैज्ञानिक श्रीमती नीरजा पटैल ने केन्द्र की प्रसार गतिविधियों के बारे में अवगत कराते हुए सूचना एवं संचार तकनीकी का उपयोग कर अपने उत्पादन की मार्केटिंग कर उचित मूल्य अर्जित करने के बारे में बताया।

  केन्द्र की प्रसार वैज्ञानिक श्रीमती अंकिता पाण्डेय ने मोटे अनाज की महत्ता पर प्रकाष डालते हुए बताया कि आज हमारे देश में मधुमेह की समस्या विकराल रूप धारण कर रही है, मोटे अनाज के सेवन से मधुमेह की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने मोटे अनाज के सेवन से वजन कम करना, कोलेस्ट्रॉल कम करना, बी.पी. एवं हृदय संबंधी बीमारियों को नियंत्रित करना आदि फायदों के बारे में विस्तार से चर्चा की।

केन्द्र की मृदा वैज्ञानिक डॉ. सविता कुमारी ने अच्छी गुणवत्तायुक्त पैदावार हेतु संतुलित एवं जैविक उर्वरकों के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने खेती में वर्मी कंपोस्ट खाद की उपयोगिता के बारे में बताया एवं वर्मी कंपोस्ट बनाने की विधि के बारे में कृषकों को अवगत कराया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र, देवास पर किसानों को तकनीकी जानकारी के साथ-साथ प्रदर्शनी के माध्यम से कृषि संबंधित ज्ञान प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 150 कृषक एवं कृषक महिलाओं ने भागीदारी की।