इंदौर, जीवन में तनाव का सबसे बड़ा कारण यह है कि हम जीवन को वास्तव में जीते कम है और जीने का अभिनय ज़्यादा करते हैं। हम वास्तविकता और प्राकृतिक ढ़ंग से जीने के बजाए बनावटी जीवन जीते हैं।
लाइफ कोच डा. गुरमीत नारंग के अनुसार जीवन में खुश रहने के लिए बहुत ज्यादा जतन नहीं करना पड़ते उसे अनायास ही महूसस किया जा सकता है। तनाव रहित और खुशमिजाज रहने के लिए हमें कुछ बातों पर विशेष ध्यान देना होगा। हम खुश रहने के लिए, खुशियां पाने के लिए कई तरह की गलत धारणाएं बना लेते हैं और जब वह नहीं मिलता को खुश होने के बजाए हम तनाव महसूस करते हैं। वास्तव में हम यह जानते ही नहीं कि हम क्या चाहते हैं। हम जो तय करते हैं उसे पाने के बाद दूसरे के बारे में सोचते हैं, नया खोजते हैं। हमें वास्तव में क्या चाहिए के स्थान पर पर हमें क्या करना चाहिए इस बात की कम परवाह करते हैं।
हम इस बात की ज्यादा परवाह करते हैं कि दूसरों के समक्ष हम कैसे दिखते हैं। हम कार्य और भौतिक संपत्ति का अधिक मूल्यांकन करते है और रिश्तों को पोषित करने के मूल्य को कम आंकते हैं। हम यह नहीं जानते कि भौतिक वस्तुएं हमें केवल क्षणिक सुख ही दे सकती हैं। जीवन में कुछ सकारात्मक तनावा भी जरूरी होता है जो हमारे विकास के लिए होता है। पर हम अनचाहे तनाव को इतना अधिक अपना लेते हैं कि जीवन सामान्य तरीके से चलने से परे हो जाता है और हम दुखी रहने लगते हैं।
परिणाम स्वरूप हम रोग आदि से घिरते जाते हैं और कार्य करना कठिन हो जाता है। बेकार के तनाव से बचने के लिए हमें प्रकृति से सीखना चाहिए। हम पक्षी से सीखें कि जो उन्हें भाता है वही दाना वे खाते हैं। यही नहीं वे उतना ही दाना लेते हैं जितनी उन्हें या उनके चूजों के लिए जरूरी होता है। जरूरत से ज्यादा संग्रह भी दुख की वजह है।

