कालजयी
यह सिर्फ एक शब्द नही है अपितु यह वह अवस्था है जिसमें से गुजर कर भारतीय संगीत के पुरोधा श्री कुमार गंधर्व ने काल पर विजय प्राप्त की थी
जब तपेदिक की बीमारी से जूझते हुए कुमार गंधर्व को डॉक्टर की सलाह पर देवास आना पड़ा उस दौर की इस गम्भीर बीमारी पर उन्होंने विजय प्राप्त की उसके पश्चात के कुमार गंधर्व व पहले के कुमार गंधर्व में जमीन आसमान का फर्क था
देवास को उन्होंने अपनी कार्यस्थली बनाया जिससे देवास भी भारतीय संगीत की दुनिया में नाम हुआ उसके पश्चात कुमार गंधर्व जीवनपर्यन्त देवास में ही रहे
इस कार्यक्रम में दिनांक 19/1/24 से प्रारंभ हो कर 21/1/24 तक गायन,वादन,एवम चर्चा के शेषन रखे गये है
पहले दिन शाम 5.30 से 9 रात्रि
दूसरे दिन सुबह 9.30 से दोपहर 1
शाम 5.30 से रात्रि 9
तीसरे दिन सुबह 9.30 से दोपहर 1
शाम 5.30से रात्रि 9 तक यह कार्यक्रम चलेगा
यह जन्मशती समारोह देश के विभिन्न स्थानों पर संस्थान के द्वारा आयोजित किया जा रहा है कुल 15 से 18 स्थानों पर आयोजित किया जाना है जिसमें से कुछ स्थानों पर यह आयोजन हो चुका है
कुमार गंधर्व संस्थान के सहयोग से संगीत प्रेमियों के लिए कुछ प्रकाशनों के साथ मिलकर संगीत की पुस्तकों का भी प्रकाशन किया गया है जो कि सभी के लिए उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है जिसे संगीत प्रेमी खरीद सकते हैं
देश विदेश से करीब 250 से अधिक मेहमान देवास आ रहे है व इस कार्यक्रम में कुछ कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे
संस्थान का आग्रह है कि देवास की संगीत प्रेमी जनता इस आयोजन का लाभ ले कुमार गंधर्व के इस जन्मशती समारोह को
