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देवास अजब है सबसे गजब है यहाँ देवास नगर निगम जो भी करे वह कम है



 नगर निगम देवास का 59 लाख से अधिक का सम्पत्ति कर डकारने की नीयत रखनेवाले अशासकीय विंध्याचल एकेडमी सीबीएसई स्कूल की फाइल महापौर की टेबल पर रखी है ।

देवास नगर निगम में जो भी कार्य जोकि होना चाहिए लेकिन वह कभी भी होता ही नही है क्योंकि यहाँ पर हर कार्य करने का एक निश्चित पैमाना है यदि आप उस पैमानों में फिट हो जाते हो तो आपको कुछ भी नही करना पड़ेगा ओर यदि फिट नहीं है तो आपकी चप्पल घिस जाएंगी लेकिन आपका कार्य नही होगा ।

गौरतलब है कि देवास नगर निगम अपने सभी बक़ायादारो के खिलाफ संम्पत्ति कुर्की की कार्यवाही शुरू करने में देर नही करता लेकिन बड़े बड़े बकाया दारो को हाथ भी नही लगाता है

देवास यदि बकायदारों की यदि सूची जारी की जाये तो जनता को मालूम पड़ेगा कि देवास नामी लोगों की सूची देवास की जनता को देखने को मिलेगी लेकिन उनके मोहरे ऐसी सूची को जनता के सामने आने ही नही देते यदि ये सूची मांगी भी जाती है तो अटकाने लटकाने में ही आपकी चप्पल घिसवा देंगें ।

          

नगर निगम तो घोटालो की खदान है यहाँ पर फर्जी दैनिक वेतन भोगी,प्रधानमंत्री आवास योजना, डीजल घोटाला, ओर अन्य सभी विभागों में घोटाले चलते रहते हैं बस अपने आकाओं को संतुष्ट करते रहो


         


            बताया जा रहा है नगर के लिए, नगर के लोगों के हितों के लिए, नगर के अधिकारों के लिए लड़नेवाले, नगर की बेशकीमती जमीनों को भू माफियाओं से बचानेवाले सामाजिक कार्यकर्ता ललित चौहान ने लगभग एक साल पहले अशासकीय विंध्याचल एकेडमी सीबीएसई स्कूल के खिलाफ शिकायत की थी,जिस पर 59 लाख रुपए से अधिक का सम्पत्ति कर बकाया है। सामाजिक कार्यकर्ता ललित चौहान को न्याय निर्णय की आशा में अपनी शिकायत को महापौर की टेबल तक पहुंचाने में क्या-क्या पापड़ बेलने पड़े होंगे,कितनी बार शिकायत को आगे बढ़ाने के लिए विभागों के चक्कर लगाने पड़े होंगे, ये ललित चौहान ही जानते हैं। प्रायः देखने में आया है देवास नगर निगम कर वसूली के मामले में आम नागरिकों के प्रति बेरहम, ह्रदयहीन, असंवेदनशील है, लेकिन वही नगर निगम बड़े करदाताओं के प्रति नरम दिल है, अतिसंवेदनशील हैं।आम आदमी को नियम-कायदों के डंडे मारने वाला नगर निगम, अशासकीय विंध्याचल एकेडमी सीबीएसई स्कूल की फाइल को अपील समिति में सुन  रहा है, जबकि नगर पालिक निगम में विधिक सहायता हेतु नियुक्त किए गए अभिभाषक ने विंध्याचल एकेडमी सीबीएसई स्कूल की नोटशीट पर स्पष्ट नोट लिखा है कि 30 दिन की अवधि के बाद अपील नहीं हो सकती, बावजूद विंध्याचल एकेडमी का मामला अपील समिति में सुना जा रहा है, जो कईं शंकाओं को जन्म दे रहा है। क्या नगर निगम के सम्पत्ति कर विभाग में सबकुछ ठीक नहीं है? क्या सम्पत्ति कर विभाग में भ्रष्टों का जमावड़ा है? क्या सम्पत्ति कर विभाग के बड़े, मंझले अधिकारी और निचले कर्मचारी, विंध्याचल एकेडमी के संचालक को सम्पत्ति कर डकार जाने के तौर-तरीके बताने में युद्धस्तर पर जुटे हुए हैं? क्या देवास नगर निगम का सम्पत्ति कर विभाग महापौर को गुमराह कर रहा है या फिर महापौर स्वयं ही विंध्याचल एकेडमी सीबीएसई स्कूल से सम्पत्ति कर की भारी-भरकम राशि वसूल करने के प्रति गंभीर नहीं हैं ?नगर पालिक निगम के नियुक्त अभिभाषक द्वारा विंध्याचल एकेडमी के मामले में अभिमत देने के बाद इस मामले को अपील समिति में रखा ही नहीं जाना था, नियमानुसार तो स्कूल को समय सीमा के अंदर 59 लाख से अधिक रूपए की राशि जमा करने का आदेश देना था, अन्यथा कुर्की आदेश का विकल्प खुला रखना था। अब बताया जा रहा है विंध्याचल एकेडमी की फाइल महापौर की टेबल पर रखी है, शिकायत को सालभर तो हो गया, फाइल अभी भी महापौर की टेबल पर बताई जा रही हैं, तो सवाल खड़ा हो रहा है कि महापौर की टेबल पर विंध्याचल एकेडमी सीबीएसई स्कूल की फाइल क्या दूध दे रही हैं? महापौर को समझना चाहिए यह फाइल चलेगी तो नगर निगम को लगभग साठ लाख रुपए का राजस्व प्राप्त होगा, क्या महापौर नहीं चाहती कि नगर निगम को इतनी बड़ी धनराशि राजस्व के रूप में प्राप्त हो और नहीं चाहती तो क्यों नहीं चाहती?