देवास कभी कांग्रेस की परम्परागत सीट मानी जाती थी लेकिन देवास रियासत के उस समय के युवराज तुकोजीराव पंवार ने जो एक बार भाजपा का झंडा बुलंद किया तब से लेकर आज तक कांग्रेस इस सीट पर भाजपा को टक्कर देने में विफल रही हैं
पूर्व में देवास विधानसभा क्षेत्र से चंद्रप्रभाष शेखर अंतिम कांग्रेसी विधायक रहे थे लेकिन जब उनके मुकाबले में देवास के युवराज आये तो वो भी हार कर देवास से बिदा हो गये लेकिन बताया जाता हैं कि देवास के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने जो उनके साथ किया था वैसा ही हर कांग्रेसी नेताओं के साथ हो रहा है
एक कहावत है कि दगा किसी का सगा नही
हुआ था ऐसा की देवास के कांग्रेसी नेताओं ने एक बैठक कर देवास में बाहरी नेताओं को देवास से बाहर का रास्ता दिखाया गया था लेकिन कहते है कि कर्मो का फल तो भोगना पड़ता है इसीलिये लोग कहते है कि अपने साथ धोखा होने के बाद चंद्रप्रभाष शेखर की बददुआ देवास विधानसभा क्षेत्र को लगी है
देवास में कांग्रेसी नेताओं में पहले से ही गुट बाजी जारी थी जो कोई भी टिकट लाने में सफल होता बाकी लोग मिल कर निपटा देते है खैर अब तो कांग्रेस में दो ही गुट है कमलनाथ व दिग्विजय गुट ओर देवास जिले की समस्त सीटो पर इन्ही दोनों की चलेगी
अभि तो देवास की 5 विधानसभा में 4 भाजपा 1 कांग्रेस है
यदि ऐसा ही चलता रहा तो कांग्रेस कभी भी देवास सीट नही जीत सकती यदि कोई अच्छा उम्मीदवार कांग्रेस की ओर से दिया जाता है जोकि जनता को पसंद हो तो कांग्रेस का सपना पूरा हो सकता है
