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बागली जिले के समर्थन में उमड़ा हुजूम,आदिवासी समाज ने भी किया समर्थन नगर रहा बंद,अनिश्चितकालीन धरना भी शुरू

 बागली जिले के समर्थन में उमड़ा हुजूम,आदिवासी समाज ने भी किया समर्थन


नगर रहा बंद,अनिश्चितकालीन धरना भी शुरू

सोमेश उपाध्याय बागली






देवास (बागली)।जैसे ही चुनाव नजदीक आते है क्षेत्र के मुद्दे गरमा जाते है,जनता नेताओ को चुनाव पूर्व किए अधूरे वादे याद दिलाने लग जाती है। पिछले एक दशक से अधिक समय से ऐसा ही मसला बागली को जिला बनाने का है। मुख्यमंत्री ने पिछले 3 चुनावों में बागली  को जिला बनाने का वादा किया था,पर वादा आज तक अधूरा है, 2 वर्ष पूर्व बागली को जिला बनाने की घोषणा के बावजूद मांग पूरी न होंने पर अब क्षेत्र के लोगो ने धरना प्रदर्शन का मार्ग अपनाया है।  शहीदे आजम सरदार भगतसिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर विशाल पैदल मार्च निकाला गया जो थाना चौराहा स्थित पूर्व मुख्यमंत्री स्व.कैलाश जोशी की  प्रतिमा स्थल पर धरने में तब्दील हुआ।जहा जोशी की प्रतिमा व आदिवासी नायक बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण के बाद धरने की शुरुआत की गई। आंदोलन कारियो ने कहा की प्रस्तावित बागली जिले का गजट नोटिफिकेशन जारी न होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा।अभियान के पहले दिन करीब 14 संगठनों का समर्थन प्राप्त हुआ।व्यापारी संघ ने भी अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। अभिभाषक संघ भी दोपहर तक अपने कार्य से विरत रहा। 


रामायण की चौपाई बनी आकर्षण का केंद्र :

धरना स्थल पर बड़े अक्षरों में रामायण की चौपाई "रघुकुल रीत सदा चलीआई,प्राण जाए पर वचन न जाई" का बड़ा पोस्टर लगाया गया है।गौरतलब है की सीएम ने इसी चौपाई को कोट कर बागली को जिला बनाने की घोषणा की थी।


आदिवासी समाज ने भी किया समर्थन :

क्षेत्र के आदिवासी समाज जनों ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर बागली जिला बनाओ अभियान का समर्थन किया। समाज जिन्होंने कहा कि बागली क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य और पिछड़ा है। जिला न होने से सबसे ज्यादा नुकसान आदिवासियों का ही होता है। आदिवासियों ने बागली जिला बनाने के समर्थन में खूब नारेबाजी भी की।समिति द्वारा प्रस्तावित बागली जिले का प्रतीक चिन्ह आदिवासी संगठन के प्रमुख लोगो को भेंट किया।