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कृषि विज्ञान केन्द्र देवास में वैज्ञानिक सलाहकार समिति बैठक का हुआ आयोजन

 कृषि विज्ञान केन्द्र देवास में वैज्ञानिक सलाहकार समिति बैठक का हुआ आयोजन




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     देवास 09 जून 2023/ कृषि विज्ञान केन्द्र देवास में 32वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति बैठक का आयोजन हाईब्रिड माध्यम से किया गया। बैठक में सर्वप्रथम केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. ए.के. बड़ाया ने कार्यक्रम ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य के बारे में बताया। तत्पश्चात् वैज्ञानिक डॉ. महेन्द्र सिंह द्वारा विगत 06 माह की आयोजित गतिविधियों का प्रगति प्रतिवेदन एवं आगामी 06 माह की प्रस्तावित कार्ययोजना के संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।


     निर्देशक विस्तार सेवाएं  रा.वि.सिं.कृ.वि.वि. ग्वालियर के प्रतिनिधि डॉ. रमेश आसवानी ने बताया कि उद्यानिकी फसलों में आधार खाद की तुलना में तरल उर्वरकों के प्रयोग की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने बताया कि खेती में प्राकृतिक खादों का प्रयोग करें। अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय इंदौर के प्रतिनिधि डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि समन्वित खेती प्रणाली आज की आवश्यकता है साथ ही उन्होंने क्षेत्र में बकरी पालन बढ़ाने पर भी जोर दिया। निदेशक अटारी जबलपुर के प्रतिनिधि डॉ. ए.के. राउत ने कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा दिये गये प्रस्तुतीकरण की सराहना करते हुए क्षेत्र में जैव- संवर्द्धित किस्मों के विस्तार का सुझाव दिया।


     भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इंदौर से डॉ. बुद्धेश्वर दुपारे ने बताया कि कृषक बीजोपचार कर ही सोयाबीन की बुवाई करें। साथ ही उन्होंने तरल जैव उर्वरकों के उपयोग पर जोर दिया। कृषि विज्ञान केन्द्र इंदौर के वैज्ञानिक डॉ. राधेश्याम टेलर ने फसल विवधिकरण को बढ़ावा देने पर जोर दिया। कृषि विज्ञान केन्द्र उज्जैन से वैज्ञानिक डॉ. हंसराज जाटव ने बताया कि कृषक सोयाबीन की एक ही किरम पर निर्भर ना रहकर अन्य किस्मों का भी प्रयोग करे।


     कृषि विज्ञान केन्द्र शाजापुर के वैज्ञानिक डॉ. डी. के. तिवारी ने केन्द्र द्वारा किए जाने वाले कार्यों की सराहना की। उप संचालक कृषि श्री आर.पी. कनेरिया ने फसल विवधिकरण व खरीफ में सोयाबीन की दो से अधिक किस्मों के प्रयोग लगाने का सुझाव दिया एवं केन्द्र के कार्यों की सराहना की। परियोजना संचालक आत्मा श्रीमती नीलम चौहान ने फसल अवशेष प्रबंधन एवं प्राकृतिक खेती पर विशेष जोर दिया। सहायक यंत्री कृषि अभियांत्रिकी के प्रतिनिधि श्री अंशुल बारोड़ ने केन्द्र पर ड्रॉन प्रशिक्षण द्वारा कृषकों को कुशल बनाने की सलाह दी।


     उप संचालक पशुपालन विभाग के प्रतिनिधि डॉ. प्रदीप पंड्या ने केन्द्र द्वारा बकरी पालन के लिए वर्षभर हरे चारे की व्यवस्था के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित जाने का सुझाव दिया। सहायक संचालक मत्स्य विभाग की प्रतिनिधि श्रीमती कल्पना चतुर्वेदी ने मत्स्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कृषकों को मत्स्य बीज संचय के लिए सुझाव दिये।


     बैठक में श्री चंद्रेश अमरावंशी, श्री अंशुल बारोड़, केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. निशिथ गुप्ता, डॉ. महेन्द्र सिंह, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. लक्ष्मी, श्रीमती नीरजा पटेल, श्री विनेश मुजाल्दा, श्रीमती अंकितो पाण्डेय, श्रीमती सविता कुमारी एवं श्री पवन कुमार राजपूत, जिले के प्रगतिशील कृषकों के साथ विभिन्न कृषक उत्पादन संगठन एवं गैर-शासकीय संस्थाओं के अधिकारीगण उपस्थित थे।