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देवास में निजी स्कूलों की मनमानी पर क्या प्रशासन के आदेश से कसेगा शिकंजा

 क्या प्रशासन कस पाएगा निजी स्कूलों पर शिकंजा?




नए शिक्षा सत्र के प्रारंभ से ही निजी स्कूलो द्वारा अभिभावकों को हर तरह से परेशान करना शुरू कर दिया जाता है।

कभी किताबों के नाम पर, कभी ड्रेस के नाम पर तो कभी मनमर्जी की फीस  से अभिभावकों पर बोझ बढ़ जाता है।

निजी स्कूल अपनी स्वेच्छा से कभी अपने स्कूल की ड्रेस बदल देते हैं, तो कभी नए प्रकाशकों को आर्थिक लाभ पहुंचाने  के लिए महंगी कॉपी, किताबें खरीदने के लिए बाधित करते हैं।

प्रशासन को मिल रही शिकायतों के आधार पर इस बार जिला दंडाधिकारी और जिलाधीश ऋषव गुप्ता ने निजी विद्यालयों पर शिकंजा कसने और मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं।

स्कूल संचालकों के एकाधिकार को खत्म करने के लिए 10 बिंदुओं में निर्देश जारी किए गए हैं।

जिलाधीश द्वारा जारी आदेश में प्रत्येक स्कूल को अपनी पुस्तकों की सूची सूचना पटल और वेबसाइट पर अपलोड करना होगी और अभिभावकों को भी उपलब्ध कराना होगी।अप्रैल माह का शिक्षण सत्र 30 दिवस का होगा। स्कूल में नियामक बोर्ड या संस्था जैसे माध्यमिक शिक्षा मंडल या एनसीईआरटी जैसी प्रकाशित पाठ्यक्रमों के अलावा अन्य प्रकाशकों की पुस्तकों को खरीदने के लिए बाधित नहीं कर पाएंगे। स्कूल संचालकों के यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वो किसी एक विशेष दुकान को लाभ पहुंचाने के लिए अभिभावकों को एक दुकान से ही खरीद के लिए बाधित न करें। सभी पुस्तकों पर मूल्य अंकित होने के साथ किताबों कवर आदि पर विद्यालय का नाम अंकित नहीं होना चाहिए।

जिलाधीश के इस आदेश में पालकों और अभिभावकों की समस्याओं का ध्यान रखा गया है लेकिन क्या निजी विद्यालय इन सब आदेशों का पालन कर पाएंगे यह एक प्रश्न ही है।