यूं तो देवास में नगर निगम जो भी करें वह कुछ कम होता है जब कभी भी अवैध अतिक्रमण को हटाना होता है तो प्रशासन वर नगर निगम अपने राजनीतिक दबाव के चलते कार्यवाही करता है लेकिन यूं तो नगर निगम को संपत्ति कर वह जलकर की बकाया राशि वसूलने में जिन लोगों के बिल 5000 से लेकर 25000 तक के हैं उनके यहां पर कुर्की की कार्यवाही की जाती है लेकिन अवैध रूप से चल रहे आईटीआई ग्राउंड पर मेले के बारे में राजस्व वसूली की बात आती है तो नगर निगम के कर्ताधर्ता ओं को सांप सूंघ जाता है गौरतलब है कि जिला आईटीआई ग्राउंड पर पुरानी परिपाटी के अनुसार कृषि दशहरा प्रदर्शनी जिस को स्थानीय भाषा में मीना बाजार कहा जाता है वह लगता है जिसको नगर निगम देवास द्वारा लगाया जाता है जहां पर अन्य राज्यों से आकर के व्यापारी वर्ग अपनी विभिन्न तरह की दुकानें लगाता है और बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले व अन्य चीजें होती हैं लेकिन यह जो मेला लगा हुआ है यह शुद्ध रूप से नगर निगम को लाखों रुपए की राजस्व की हानि पहुंचा रहा है गौरतलब है कि मेले के कर्ताधर्ता होने नगर निगम से कोई परमिशन नहीं ली वह जब आईटीआई प्रिंसिपल श्री रावल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि एसडीएम ऑफिस से फोन आने के बाद हमने उन्हें हां कहा था लेकिन हमें या नगर निगम को कोई राजस्व मिल रहा है या नहीं मिल रहा इसकी कोई जानकारी नहीं है इस बारे में एसडीएम कार्यालय भी मौन है वन नगर निगम देवास भी मौन साध कर बैठ गया है जिन पार्षदों व कुछ नेताओं ने इस मामले को उठाया था वह भी कल से चुप्पी लगाकर बैठे हैं इस मेले में तकरीबन 40 से 50 दुकानें लगती हैं अगर औसतन ₹5000 किराया भी माना जाए तो 2000000 रुपए का राजस्व की हानि हो रही है और इस मेले में मेला लगाने वाले प्रति व्यक्ति से प्रवेश शुल्क भी वसूल रहे हैं जोकि गैर वाजिब है देवास की जनता पैसे देकर मेले का लाभ उठा रही है क्योंकि महापौर परिवार अपनी तीर्थ यात्रा में व्यस्त है तो कोई भी इस बारे में बात करने को तैयार नहीं है यह लाखों रुपए के राजस्व की हानि को नगर निगम किस तरह से वसूल पाता है यह देखने योग्य बात होगी
