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देवास में शहर के मध्य बना ब्रिज भाजपा और कांग्रेस के बीच शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बन गया है गौरतलब है कि कमलनाथ के कार्यकाल के दौरान ब्रिज की स्वीकृति होने का दावा कांग्रेश करती है वही भाजपा इसको बनाने का श्रेय लेना चाहती है और बताती है कि डबल जन की सरकार में हमारे द्वारा ही यह ब्रिज बनाया गया है ब्रिज के लोकार्पण के अवसर पर कल कांग्रेसियों ने अपना विरोध प्रदर्शन किया

 देवास-कल दिन भर कांग्रेस के भारी विरोध के बीच मुख्यमंत्री चौहान ने देवास में वर्चुअल सामिल होकर इन्‍दौर-देवास रोड पर 102 करोड़ की लागत से बने  नवनिर्मित ब्रिज का किया लोकार्पण... कांग्रेस विरोध के बीच बारिश भी होने से शाम 6 बजे होने वाला कार्यक्रम भी देरी से हुआ सम्पन, विरोध में उतरे कांग्रेसियों को प्रशासन ने भेजा जेल..

लोकार्पण कार्यक्रम के प्रचार प्रसार को लेकर..भाजपा से सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी द्वारा सोशल मीडिया हैंडल पर कहीं नाराजगी तो कहीं सीएम से ब्रिज के नाम को लेकर की गई पोस्ट भी चर्चाओं का विषय बनी।


जहा भाजपा गुट बाजी से अपने आप को नकारती है, वही सांसद और देवास भाजपा विधायक की बीच की वैचारिक दीवार अब साफ नजर आने लगी है,




दरअसल,, 

देवास नवनिर्मित ब्रिज के लोकार्पण कार्यक्रम से पहले कांग्रेसियों ने किया जोरदार विरोध प्रदर्शन.. ब्रिज का नाम रखा जबरन ब्रिज..


 राजनीतिक हलचलो में अब रहे विवादित बीच ब्रिज का कल हुआ लोकार्पण, 


संबंधित ब्रिज के प्रस्तावित डीपीआर के अनुरूप स्थान परिवर्तित करने के आरोपो के साथ लगातार कांग्रेस का विरोध बना हुआ है,


कुछ दिन पहले ही ब्रिज का नाम कांग्रेसियों ने बड़े विरोध के साथ जबरन ब्रिज रख कर प्रदर्शन किया था।


कल देर शाम को होने वाले नवनिर्मित ब्रिज के लोकार्पण कार्यक्रम से पहले भी कांग्रेसियों ने काले कपड़े पहन कर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया और जबरन ब्रिज के नाम से संबोधित पेमपलेट भी बांटते नजर आए।


हालांकि प्रशासन ने कांग्रेसियों को रोककर उन्हें जेल भेज दिया।। कांग्रेसियों की मानें तो यह ब्रिज कांग्रेस काल में प्रस्तावित हुआ था और इसका डीपीआर बदले बिना ही ब्रिज का स्थान परिवर्तन कर दिया गया।। जिसकी शिकायत कर *पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिख कर जांच की मांग भी की है* 



देवास शहर में केंद्रीय परिवहन मंत्री  नितिन गडकरी द्वारा कांग्रेस कार्यकाल में PWD मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के समय प्रदेश के सबसे लंबे एक फ्लाईओवर ब्रिज के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। जिसे राज्य में सरकार बदली के बाद भाजपा सरकार आने पर ब्रिज को दो भागों में बांट कर स्थान परिवर्तित कर दिया गया था जिसको लेकर कांग्रेस का विरोध लगातार बना हुआ है।।