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भारतीय वायुसेना के पराक्रम युद्ध के बीच 121 यात्रियों को लेकर लौटी

 रात के 2 बजे हैं, सूडान की राजधानी खरतूम से कुछ 40 किलोमीटर दूर एक छोटे से ज़मीन की पट्टी पर काफी तेज हलचल हो रही है. भारतीय दूतावास के कुछ लोग वहा फंसे 121 भारतीय को लेकर वहां पहुंचते हैं. उनमें एक गर्भवती महिला भी है.  


एकदम सन्नाटा है और घुप अंधेरा, फिर दूतावास के लोग उस ज़मीन के अगल बगल फैल कर टॉर्च और आग से थोड़ी रौशनी करते है, जैसे एक हवाई अड्डे पर रनवे के इर्दगिर्द होती है और फिर थोड़ी हीं देर के एक हवाई जहाज आता दिखता हैं.


यह भारत का हरकुलिस C130 है जो उस छोटे से जमीन के टुकड़े पर लैंड करने की कोशिश करेगा, जमीन समतल नही है, और मेकशिफ्ट एयरस्ट्रिप पर रौशनी भी नही है, कुछ दूरी पर युद्ध चल रहा है, और अगर विरोधी गुटों को पता चला तो पूरा प्रयास दुर्घटना में तब्दील हो सकता है. लैंडिंग खतरे से भरा हो सकता है, यह विमान फिर भी कोशिश करेगा.


कुछ प्रयास के बाद यह लैंड भी हो जाता है और जल्दी जल्दी सारे भारतीयों को बिठा कर फिर से उसी पट्टी से उड़ान भी भरता है. सारा काम कुछ ही घंटो में गजब की एफिशिएंसी से पूरा होता है


यह नया भारत है, अगर आपको उम्मीद है तो यह देश आपको बचाने भी आयेगा. चाहे आप कही भी फंसे हों. जय हिंद.