ताजमहल को तेजोमहल शिवमंदिर के रूप में प्रदर्शित करता नवदुर्गा का पांडाल
सुभाष चौक में शिव और शक्ति के स्वरूप में विराजित 21 फीट की दुर्गा प्रतिमा
देवास। आगरा में ताज महल को लेकर लम्बे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है। हिन्दू संगठनों द्वारा वर्षो से शिव मंदिर बताया जाता रहा है। हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें अदालत से ताजमहल के मुख्य हिस्से में स्थित उन 22 कमरों को खोलने की मांग की गई है, जहां प्राचीन शिवलिंग सहित हिन्दू देवी देवताओं के होने का दावा किया गया है। जिनका जिक्र इतिहास की किताबों और दूसरे दस्तावेजों में भी मिलता है। इसी याचिका में ये भी लिखा है कि यमुना किनारे जिस जगह अभी ताजमहल मौजूद है, वहां वर्ष 1212 में राजा परमर्दि-देव ने भगवान शिव का मन्दिर बनवाया था, जिसे तेजो महालय या तेजोमहल कहा जाता था। देवास के सुभाष चौक में शिवशक्ति नवदुर्गा उत्सव समिति एवं राजपूत समाज के पारम्परिक नवदुर्गा पांडाल को ताजमहल को इसी तेजोमहल शिव मंदिर के रूप में प्रदर्शित किया गया है। समिति के शेखर कौशल, शैलेन्द्रसिंह गौड़ ने बताया कि कि ताजमहल के मुख्य हिस्से एवं दीवारो पर आज भी हिन्दू संस्कृति से जुड़े प्रतीक चिन्ह देखे जा सकते है। इतिहासकारो का भी यही मत रहा है। श्री कौशल एवं श्री गौड़ ने यह भी कहा कि जब इतिहासकारो के अनुसार मुमताज को निधन के उपरांत बुरहानपुर में ताप्ती नदी के किनारे दफनाया गया था तो उसकी याद में ताजमहल को मकबरा बताया जाना ही गलत है। हमने नवदुर्गा पांडाल को हिन्दू समाज की भावनाओं एवं दावे को प्रकट करते हुए तेजोमहल शिव मंदिर का स्वरूप दिया है। पांडाल में शिव और शक्ति के स्वरूप में 21 फीट की विशाल मनमोहक नवदुर्गा प्रतिमा की स्थापना की गयी है, जो कि शहर की सबसे बड़ी नवदुर्गा प्रतिमा है। पांडाल में दिन ढलने के साथ ही दर्शनार्थी भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। रात्रि 9 बजे शहर के गणमान्य जनों के करकमलो से महाआरती सम्पन्न की जा रही है। इसके पश्चात भी देर रात्रि तक तेजोमहल पांडाल एवं मॉ के दर्शन करने दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है।

